सकारात्मक शब्दों का मिलाप कर अनमोल वचनों या सुविचार का निर्माण किया जाता हैं।जिससे जीवन मे हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बनीं रहती हैं।उसी उर्जा से हम कठिन परिश्रम कर लक्ष्य में सफलता हासिल करते हैं।
जीत खुशियां दे जाती हैं औऱ हार नई सीख दे जाती हैं।
हार जीत कुछ न कुछ जरूर दे जाती हैं।
जिससे मंजिल से मिलने की समझ आ जाती हैं।
समझना पड़ेगा लक्ष्य को बारिकी से और
समझ तभी आती हैं।
जब लक्ष्य से मिलने की बारी आती हैं।
असफलता से तुम्हारे सपने नही टूटे और ना ही
मंजिल तक जाने वाले रास्ते झूठे
मेहनत और लगन के बलबूते ही
मंजिल को छूते।
लक्ष्य तुम्हारा तुमसे रूठा नहीं है
और ना ही तुम्हारे प्रयास झूठे हैं
ये लक्ष्य तक जाने वाले रास्ते है
इतने बड़े
क्योकि तुम लक्ष्य को पाने के लिए हो खड़े।
हार होती हैं।तो प्रयास करो
अनेकों बार
क्योकि मंजिल का द्वार ही हैं कुछ ऐसा
जो कदमो को पहचान लेता है।
रुकावटे आने से लक्ष्य के
दरवाजे बंद नही होते
लक्ष्य के दरवाज़े तब तक खुले है
जब तक तुम हार नही मान लेते हैं।
रुकावटे ही लक्ष्य की पहचान है और
लक्ष्य से उनकी पहचान है
जिसमें हार कर भी जितने की
चाह हैं।
जीत हार करने से कुछ हासिल
नहीं होगा
अगर जीवन मे सफलता हासिल करना है
मेहनत औऱ लगन को शामिल करना होगा।
लक्ष्य को अफ़सोस होता है
जब हार मान लेते हैं
लक्ष्य के नजदीक पहुंच कर
अपना मार्ग छोड देते हैं।
मंजिल को देखना जरूरी नही है।
जरूरी तो मंजिल तक दौड लगाना
घड़ी को देखना जरूरी नही हैं।
जरूरी तो समय के साथ चलना है।
सफलता पाना आसान है।
जब मेहनत औऱ लगन एक
समान है।
औऱ कोई कमाल नही है।
यही एक सवाल का हल हैं।
जीतना जरूरी है ।
हारना नही
लक्ष्य को पाना जरूरी हैं।
लक्ष्य को छोड़ना नही
जिनके प्रयास भरपूर हैं
उनके लक्ष्य दूर नही
जीत खुशियां दे जाती हैं औऱ हार नई सीख दे जाती हैं।
हार जीत कुछ न कुछ जरूर दे जाती हैं।
जिससे मंजिल से मिलने की समझ आ जाती हैं।
समझना पड़ेगा लक्ष्य को बारिकी से और
समझ तभी आती हैं।
जब लक्ष्य से मिलने की बारी आती हैं।
असफलता से तुम्हारे सपने नही टूटे और ना ही
मंजिल तक जाने वाले रास्ते झूठे
मेहनत और लगन के बलबूते ही
मंजिल को छूते।
लक्ष्य तुम्हारा तुमसे रूठा नहीं है
और ना ही तुम्हारे प्रयास झूठे हैं
ये लक्ष्य तक जाने वाले रास्ते है
इतने बड़े
क्योकि तुम लक्ष्य को पाने के लिए हो खड़े।
हार होती हैं।तो प्रयास करो
अनेकों बार
क्योकि मंजिल का द्वार ही हैं कुछ ऐसा
जो कदमो को पहचान लेता है।
रुकावटे आने से लक्ष्य के
दरवाजे बंद नही होते
लक्ष्य के दरवाज़े तब तक खुले है
जब तक तुम हार नही मान लेते हैं।
रुकावटे ही लक्ष्य की पहचान है और
लक्ष्य से उनकी पहचान है
जिसमें हार कर भी जितने की
चाह हैं।
जीत हार करने से कुछ हासिल
नहीं होगा
अगर जीवन मे सफलता हासिल करना है
मेहनत औऱ लगन को शामिल करना होगा।
लक्ष्य को अफ़सोस होता है
जब हार मान लेते हैं
लक्ष्य के नजदीक पहुंच कर
अपना मार्ग छोड देते हैं।
मंजिल को देखना जरूरी नही है।
जरूरी तो मंजिल तक दौड लगाना
घड़ी को देखना जरूरी नही हैं।
जरूरी तो समय के साथ चलना है।
सफलता पाना आसान है।
जब मेहनत औऱ लगन एक
समान है।
औऱ कोई कमाल नही है।
यही एक सवाल का हल हैं।
जीतना जरूरी है ।
हारना नही
लक्ष्य को पाना जरूरी हैं।
लक्ष्य को छोड़ना नही
जिनके प्रयास भरपूर हैं
उनके लक्ष्य दूर नही
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें